Wednesday, 12 July 2017

शहर बीमार है

फिर से शहर ये है बीमार,
है क्या कोई तीमारदार,
है क्या कोई शल्य तैयार
फिर से शहर ये है बीमार,

धुंध,धुम्र, फर्क जाने कौन,
कौन यहाँ पहचाने मौन,
 वृक्ष सब में है  हाहाकार
फिर से शहर ये है बीमार

सब मुंह खुले, सब आँखें बंद,
हैं जाग रहे मनुज बस चंद,
फैला अपशिष्ट, नीर में विकार
फिर से शहर ये है बीमार,
है क्या कोई तीमारदार,
है क्या कोई शल्य तैयार

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