Saturday, 30 July 2016

बैठे बैठे कुछ कश्मीर के हालात पर -

बैठे बैठे कुछ कश्मीर  के हालात पर - 

उजाले, आते हैं जातें हैं, अँधेरे भी, 
कोई शोर नहीं, कोई आवाज़ नहीं,
ज़रूरी तो नहीं, अमन का दुश्मन
सोया हो कहीं चैन से अमन में.

बस मैं सच हूँ और कोई कुछ भी 
ऐसी सोच भी मुनासिब तो नहीं
संग मारूंगा, तो कुछ तो लौटाएगी
फ़ौज, कश्मीरी बरामहन तो नहीं.

चलते चलते कुछ गुरदीप के विषय में - 

खुल  के कारागारों से कारोबार करते हैं
बेचने वाले, ज़हर, शहर में 
मैं आज़ाद तो हूँ पर चुप रहता हूँ
बंद कर दरवाजे अपने ही घर में  


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