Saturday, 11 June 2016

सुख दुःख

जीवन ने सबको सुख
दुःख दोनों ही बांटे हैं,
सुख लगते हैं फूल तो,
दुःख लगते कांटे हैं.

कभी सुख क्या किसीको
दुःख से ज्यादा मिलता है
उपजते सौ कांटे तो फिर
एक फूल खिलता है.

मन भी सागर की लहरों सा
बहुत अधिक मचलता है,
सुख में ऊपर उठता है
तभी तो नीचे गिरता है

सुख है लगता अमृत सा,
मीठा पर है कितना नश्वर
दुःख है कड़वा मदिरा सा
पर इसी में है जीवन स्वर.


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