Friday, 24 November 2017

पहुँच मेरी आत्मा की

नहीं मात्र इस शरीर में
हूँ जहाँ तक है ये नजर
तेरा मेरी आँखों में और
मेरा तेरी आँखों में बसर

आदमी सोच सा हो जाता है
पर ऐसा अवसर न हुआ
बहुत सोचा तेरे बारे में पर
मैं अब तक ईश्वर न हुआ

मेरे पास ईशवर था के नहीँ
तेरी याद तो हमेशा ही रही
कोई मलाल नही दुख़ नहीँ
के
ना खुदा ही मिला न विसाले सनम

Sunday, 17 September 2017

सफर और जिन्दगी

जि़न्दगी और सफर,
कभी कार, कभी बेकार
कभी बस, तो कभी बेबस
कभी रेल, कभी रेलमपेल
कभी हवा हवाई, कभी चेहरे पर
जिन्दगी का सफर

Saturday, 9 September 2017

मिलना

मिट्टी में कुछ तो बात होती है
वरना कहाँ सारी दुनिया की
इस तरा मुलाकात होती है

उड़ गये थे जो परिंदे
लौट आए हैं, बरबस
सच है राह परिंदों को
घर की याद होती है

बरस सिमट कर
खो जाते हैं, जाने कहाँ
जब भी मेरी इन दोस्तों से
कहीं भी कोई बात होती है

Saturday, 5 August 2017

बेकार पड़ा दिल



फूट न जाये, दर्द से,

इधर उधर भटकता है
खाता है ठोकरें ये दिल
किसी फुटबॉल की तरह

मैं दूर तुझसे भाग भाग

तेरी यादों को पिघलता हूँ,
जो जम रहीं हैं दिल में,
मेरे, कोलेस्ट्रोल की तरह

तारीफ़ तो सबने की पर,

दिल का कोई खरीदार नहीं,
ये भी बेकार पड़ा है किसी,
फाइव स्टार मॉल की तरह



Tuesday, 25 July 2017

स्वयं से वार्ता



वो ह्रदय सागर सा करे,
तो,बातों की जलमाला, 
हैं, तटबंध में कैद जो,
का कर देता , विसर्जन

स्वयं की प्रिय से की वार्ता,
विरचे मन हिमाला में
बन भागीरथ इहरोज,
हटा देता हूँ अड़चन

शब्द समस्त मिलते  हैं
नाविक के तीर की तरह,
मैं स्वयं के ह्रदय को,
कर लेता हूँ.सागर सम




Wednesday, 12 July 2017

शहर बीमार है

फिर से शहर ये है बीमार,
है क्या कोई तीमारदार,
है क्या कोई शल्य तैयार
फिर से शहर ये है बीमार,

धुंध,धुम्र, फर्क जाने कौन,
कौन यहाँ पहचाने मौन,
 वृक्ष सब में है  हाहाकार
फिर से शहर ये है बीमार

सब मुंह खुले, सब आँखें बंद,
हैं जाग रहे मनुज बस चंद,
फैला अपशिष्ट, नीर में विकार
फिर से शहर ये है बीमार,
है क्या कोई तीमारदार,
है क्या कोई शल्य तैयार

Saturday, 1 July 2017

Crush को love कहने का डर

जब भी crush को love कहा,
उसने हमें यूँ, curse कर दिया, 
हालात सुधरने की उम्मीद को,
bad से उसने worse कर दिया.

इज़हार-ए-इश्क को समझा था,
घाव-ए-जुदाई का मरहम हमने,
बस एक ही चप्पल में उसने,
इस नासूर को nurse कर दिया.

ख्व़ाब देखता था जो दिल उसके,
video viral  होने  के डर से, 
रात भर जगता है,
सच कहा है- थप्पड़ से डर नहीं ,
साहब डर चप्पल  से लगता है.